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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 29
धर्मार्थकामैः किन्तस्य मोक्ष एव करे स्थितः । सर्वार्थः श्रीगुरौ देवि यस्य भक्तिः सदा स्थिरा ॥
श्रीगुरु में सब भावों में जिसकी भक्ति सदा स्थिर रहती है, हे देवि! उसके हाथ में धर्म, अर्थ, काम क्या मोक्ष तक विद्यमान रहता है।
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