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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 22
भक्त्या तुष्टेन गुरुणा यः प्रदिष्टः कृपालुना । कर्ममुक्तो भवेच्छिष्योः भुक्तिमुक्त्योः स भाजनम् ॥
भक्ति से प्रसन्न कृपालु गुरु द्वारा जिसे उपदेश मिलता है, वह शिष्य कर्मों से मुक्त होकर भोग और मोक्ष का अधिकारी बन जाता है।
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