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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 19
तावदाराधयेच्छिष्यः प्रसन्नोऽसौ यदा भवेत् । गुरौ प्रसन्ने शिष्यस्य सद्यः पापक्षयो भवेत् ॥
शिष्य गुरु की तब तक आराधना करे, जब तक वे प्रसन्न न हो जायँ। क्योंकि गुरु के प्रसन्न होते ही शिष्य के सब पाप नष्ट हो जाते हैं।
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