मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 18
बदा दद्यात् स्वशिष्याय स्वात्मानं देशिकोत्तमः । तदा मुक्तो भवेच्छिष्यस्ततो नास्ति पुनर्भवः ॥
जब उत्तम देशिक (आचार्य) अपने शिष्य को अपनी आत्मा प्रदान करते हैं, तब वह शिष्य मुक्त हो जाता है और इसके बाद उसका पुनर्जन्म नहीं होता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें