मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 17
यथा ददाति सन्तुष्टः प्रसन्नो वरदो मनुम् । तथा भक्त्या धनैः प्राणैर्गुरुं यत्नेन तोषयेत् ॥
जिस प्रकार सन्तुष्ट और प्रसन्न होकर बरदायक मन्त्र को प्रदान करे, उसी प्रकार भक्तिपूर्वक धन और प्राणों से गुरु को यत्न करके प्रसन्न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें