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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 16
सर्वसिद्धिफलोपेतो मन्त्रः शुध्यति शोभनः । गुरुप्रसादमूलोऽयं परतत्त्वमहाक्रमः ॥
सर्व सिद्धियों के फल से युक्त मन्त्र तब तक सिद्ध नहीं होता, जब तक गुरु में भक्ति नहीं होती। परम तत्त्व से युक्त इस महान् क्रम का मूल गुरु की प्रसन्नता है।
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