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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 112
अर्द्धयोजनगः शिष्यः प्रणमेत् पञ्चपर्वसु । एकयोजनमारम्य योजनद्वादशावधि ॥ तत्संख्यादिवसैर्मासैः श्रीगुरुं प्रणमेत् प्रिये ।
अर्ध योजन (चार मील) की दूरी पर रहने वाला शिष्य पञ्च पर्वों में प्रणाम करे। एक योजन से बारह योजन की दूर पर रहने वाला शिष्य हे प्रिये! उनकी संख्या के दिनों या महीनों में श्री गुरु को प्रणाम करे।
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