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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 111
एकग्रामस्थितः शिष्यस्त्रिसन्ध्यं प्रणमेद् गुरुम् । क्रोशामात्रस्थितः शिष्यो गुरुं प्रतिदिनं नमेत् ॥
गुरु-शिष्य एक ही स्थान में रहते हों तो शिष्य गुरु को (प्रातः, मध्यान्ह एवं सायं) तीनों सन्ध्याओं में प्रणाम करे । एक क्रोश (दो मील) की दूरी पर रहने वाला शिष्य गुरु को प्रतिदिन नमन करे।
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