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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 110
अनिवेद्य गुरोर्भुङ्क्ते यस्त्वेकग्रामसंस्थितः । अमेध्यं तद्धवेदन्नं शूकरो जायते मृतः ॥
एक ही स्थान में रहते हुये जो गुरु को निवेदित किये बिना भोजन करता है, उसका अन्न अमेध्य (अपवित्र) हो जाता है और उसे खाने वाला मरने पर शूकर होता है।
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