गुरोः प्रणामत्रितयं ज्येष्ठानामेक एव च ।
पूज्यानामञ्जलिस्तद्वदन्येषां वाक्यवन्दनम् ॥
गुरु को तीन बार, ज्येष्ठों को एक बार प्रणाम करे और पूज्यों को हाथ जोड़कर तथा अन्यों की वाणी से वन्दना करे।
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