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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 103
जाति विद्याधनाढ्यो वा दूरे दृष्ट्वा गुरुं मुदा । दण्डप्रणामं कृत्वैकं त्रिः प्रदक्षिणमाचरेत् ॥
जाति, विद्या एवं धन से सम्पन्न व्यक्ति गुरु को दूर से ही देखकर प्रसत्र हो और उन्हें दण्डप्रणाम करे और तीन बार उनकी प्रदक्षिणा करे।
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