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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 101
पश्चात्पदेन निर्गच्छेन्नमस्कृत्य गुरोर्गृहात् । एकासने नोपविशेद् गुरुणा तत्समैः सह ॥
गुरु के गृह से प्रणाम कर पीछे को पैर रखता हुआ बाहर निकले। गुरु के बराबर एक ही आसन पर न बैठे जिस पर गुरु अपने समकक्ष जनों के साथ बैठे हों।
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