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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 94
बहुनात्र किमुक्तेन रहस्यं शृणु पार्वती । वर्णाश्रमाणां सर्वेषामाचारः सद्गतिप्रदः ॥
हे पार्वति! यहाँ अधिक कहने से क्या लाभ? सभी वर्णाश्रमों के लिए आचार ही सद्‌गतिदायक है।
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