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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 93
जाम्बूनदस्य कलुषं परिशुद्धं यथाग्निना । अनाचारस्य मालिन्यं प्रायश्चित्ताग्निना दहेत् ॥
जिस प्रकार अग्नि द्वारा सोने के कालुष्य की शुद्धि होती है, उसी प्रकार अनाचार की मलीनता को प्रायश्चित्त की अग्नि से जला डालना चाहिए।
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