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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 90
नित्यं नैमित्तिकं द्रव्यं मन्त्रयन्त्रादिलोपनम् । अनर्हपशुदुः सङ्गमन्त्रसाङ्कर्यसम्भवम् गुप्तप्रकटसम्भूतं ज्ञानाज्ञानकृतं प्रिये । एवमादिषु दोषेषु पापस्य गुरुलाघवम् ॥
नित्य, नैमित्तिक, द्रव्य, मन्त्र, यन्त्रादि का न होना, अयोग्य पशुओं का कुसङ्ग, मन्त्र की सङ्करता, जान अनजान में गोपनीय का प्रकट होना आदि छोटे बड़े दोषों के पापों से हे प्रिये! पतन होता है।
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