कुलधर्म का आश्रय लेकर जो कुलाचार का पालन नहीं करता, उस स्वेच्छाचारी महापापी को आपत्ति, पाप, रोग, दरिद्रता, कलह, भय, योगिनियों का कोप, पग-पग पर गिरता रहता है।
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