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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 80
कुलधर्म समाश्रित्य आचारं यो न पालयेत् । यथेच्छचारिणस्तस्य महापातकिनः प्रिये ॥ आपदो दुरितं रोगा दारिद्र्यं कलहो भयम् । योगिनीनां प्रकोपश्च स्खलितानि पदे पदे ॥
कुलधर्म का आश्रय लेकर जो कुलाचार का पालन नहीं करता, उस स्वेच्छाचारी महापापी को आपत्ति, पाप, रोग, दरिद्रता, कलह, भय, योगिनियों का कोप, पग-पग पर गिरता रहता है।
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