कुलेशि कुलशास्त्रज्ञाः कुलपूजापरायणाः ।
ये त्वां रहसि सेवन्ते ते तिष्ठन्ति तवान्तिके ॥
हे कुलेशि! कुलशास्त्र के जो ज्ञाता कुलपूजा में परायण होकर एकान्त में आपकी सेवा करते हैं, वे आपके समीप रहते हैं।
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