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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 75
सुगुप्तकौलिकाचारमनुगृह्णन्ति देवताः । वाञ्छासिद्धिं प्रयच्छन्ति नाशयन्ति प्रकाशकान् ॥
सुगुप्त कौलिकाचार योगी पर देवता अनुग्रह करते हैं, वाञ्छा सिद्धि प्रदान करते हैं किन्तु उस सिद्धि को प्रकट करने वाले योगी का नाश करते हैं।
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