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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 73
कुलधर्मादिकं सर्वं सर्वावस्थासु सर्वदा । गोपयेच्च प्रयत्नेन जननीजारगर्भवत् ॥
कुलधर्म आदि सबको सभी दशाओं में सदा प्रयत्नपूर्वक व्यभिचारिणी के गर्भ के समान गुप्त रखे।
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