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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 72
अन्तः कौलो बहिः शैवो जनमध्ये तु वैष्णवः । कौलं सुगोपयेद्देवि नारिकेलफलाम्बुवत् ॥
अन्दर से कौल, बाहर से शैव और लोगों के बीच वैष्णव - इस प्रकार हे देवि! नारियल के जल की भांति कौल को गुप्त रखे।
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