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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 71
यथा रक्षति चौरेभ्यो धनधान्यादिकं प्रिये । कुलधर्म तथा देवि पशुभ्यः परिरक्षयेत् ॥
हे प्रिये! जिस प्रकार चोरों से धन धान्यादि की रक्षा की जाती है, उसी प्रकार पशुओं से कुलधर्म की रक्षा करे।
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