पीठ क्षेत्रागमाम्नायं तद्विद्याचारकौलिकान् ।
कुलद्रव्यादिकं देवि न वदेत् पशुसन्निधौ ॥
हे देवि! पीठक्षेत्र आगम, आम्नाय, उसकी विद्याओं, आचार, कौलिकों और कुलद्रव्यादि का वर्णन पशु के समीप न करे।
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