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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 7
अज्ञातकौलिके प्राप्ते पौर्वापर्यन्तु चिन्तयेत् । स्मृत्वा स्वस्य गुरुं देवि स्वस्य मार्गेण तर्पयेत् ॥
अज्ञात कौलिक के आने पर परम्परा का निर्वाह करे। हे देवि! अपने गुरुदेव का स्मरण कर अपने अपने मार्ग से तर्पण करे।
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