श्रीचक्रकृतवृत्तान्तं शुभं वा यदि वाऽशुभम् ।
कदाचिन्नैव वक्तव्यमित्याज्ञा परमेश्वरि ॥
श्रीचक्र का वृत्तान्तादि का गोपन श्री चक्र के शुभ अशुभ वृत्तान्त को कभी नहीं कहना चाहिए, हे परमेश्वरि यह आशा है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।