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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 62
देवतागुरुशास्त्राणां सिद्धाचारविडम्बकाः । विद्याचौरो गुरुद्रोही ब्रह्मराक्षसतां व्रजेत् ॥
देवता, गुरु और शास्त्रों के सिद्धाचार की विडम्बना तथा विद्या की चोरी करने वाला, गुरुद्रोही ब्रह्मराक्षस होता है।
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