एकत्र स्थित होने पर ज्येष्ठ और कनिष्ठ शिष्य का आचार इसी प्रकार कहा गया है। हे कुलनायिके! अन्य आचार पूर्ववत् ही होंगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।