तिष्ठन्ति कुलयोगिन्यः कुलवृक्षेषु सर्वदा ।
तत्पत्रेषु न भोक्तव्यमर्चयेत्तु विशेषतः ॥
कुल योगिनियाँ सदा कुलवृक्षों में रहती है। अतः उनके पत्तों में, भोजन नहीं करना चाहिए, अपितु विशेष रूप से उनकी पूजा करनी चाहिए।
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