परीक्षयेन्न भक्तानां वीराणाञ्च कृताकृतम् । न पश्येद्वनितां नग्नामुन्मत्तां प्रकटस्तनीम् ॥ दिवसे न रमेन्नारीं तद्योनिं नैव वीक्षयेत् ।
भक्त वीरों के किये और न किये की कभी जाँच पड़ताल न करे। नग्न, पागल, प्रकटस्तनी स्त्री को न देखे। दिन में स्त्रीसङ्ग न करे, उसकी योनि को कभी न देखे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।