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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 53
गुरुशक्तिसुतज्येष्ठकनिष्ठान् कुलदेशिकान् । कुलदर्शनशास्त्राणि कुलद्रव्याणि कौलिकान् ॥ प्रेरकान् सूचकांश्चापि वाचकान् दर्शकांस्तथा । शिक्षकान् बोधकान् योगी योगिनीसिद्धिरूपकान् ॥ कन्यां कुमारिकां नग्नामुन्मत्तां वापि योषितम् । न निन्देन्न जुगुप्सेत न हसेन्नावमानयेत् ॥ नाप्रियं नानृतं ब्रूयात् कस्यापि कुलयोगिनः । कुरूपा चेति कृष्णेति न वदेत् कुलयोषितम् ॥
गुरु की शक्ति, गुरुपुत्र, ज्येष्ठ या कनिष्ठ कौल साधक, कुलदर्शन के शास्त्र, कुलद्रव्य, कौलों के प्रेरक, सूचक, वाचक, दर्शक, शिक्षक, बोधक, योगी, योगिनी, सिद्ध पुरुष, कन्या, कुमारी, नग्न या पागल स्त्री - इनमें से किसी की न कभी निन्दा करे, न हँसी उड़ाए, न अपमान करे, न अप्रिय कहे और असत्य बात न कहे। कुल साधक कुलस्त्री को कभी 'काली' या 'कुरूपा' न कहे।
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