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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 49
गुरुशक्तिं वीरभार्या कुमारीं व्रतधारिणीम् । व्यङ्गाङ्गी विकृताङ्गीश्च कुब्जामपि न कामयेत् ॥
गुरुशक्ति (गुरुपत्नी), वीरपत्नी (वीर की पत्नी), कुमारी, व्रतधारिणी, व्यङ्गाङ्गी (विकलाङ्गी), विकृताङ्गी (विकृत अन्नों वाली) और कुब्जिका (कुबड़ी) स्त्री की भी कामना न करे।
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