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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 48
ऊढा घृता तथा क्रीता मूल्येन च समाहता । सकृत् कामरता वापि पश्च्चधा गुरुयोषितः । अलंघ्याः पूजनीयाः स्युर्गुरुवद्‌गुरुयोषितः ॥
१. विवाहिता, २. रखी हुई, ३. मूल्य से खरीदी, ४. प्रेमबद्ध एवं ५. कामरता - ये पांच प्रकार की गुरुस्त्रियाँ है। गुरु के समान ही ये अलंध्य और पूज्य है।
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