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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 35
रिपुणापि न कर्त्तव्यो वाग्वादश्चक्रमध्यतः । पितृमातृसर्म पश्येत्तेनोक्तं परुषं सहेत् ॥
चक्र के बीच में शत्रु के भी साथ वाद विवाद न करे। माता पिता के समान उसे देखे तथा उसके कठोर वचनों को भी सह ले।
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