रिपुणापि न कर्त्तव्यो वाग्वादश्चक्रमध्यतः ।
पितृमातृसर्म पश्येत्तेनोक्तं परुषं सहेत् ॥
चक्र के बीच में शत्रु के भी साथ वाद विवाद न करे। माता पिता के समान उसे देखे तथा उसके कठोर वचनों को भी सह ले।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।