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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 33
यदा सन्दीपितोल्लासः कौलिकः पशुमीक्षते । पठेद्वा पशुशास्त्राणि सङ्गच्छेद्वा पशुस्त्रियम् ॥ कुर्यात् पशुप्रसङ्ग वा पशुकार्याणि वा चरेत् । धर्मार्थायुर्यशः पुण्यमर्थसौख्यादि नश्यति ॥
उल्लासयुक्त होकर कोई कौलिक यदि पशु का साथ करता है, या पशुशास्त्रों को पढ़ता है, या पशुस्त्रियों का सङ्ग करता है, या पशुप्रसङ्ग करता है, या पशुधर्म करता है, तो उसके धर्म, अर्थ, आयु, यश, पुण्य, ज्ञान एवं सुख आदि नष्ट हो जाते है।
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