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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 32
न पात्रं लंघयेन्द्धीमान् पात्रं नोत्पातयेत् प्रिये । प्रक्षाल्य गोपयेत् पात्रमित्याज्ञा परमेश्वरि ॥
हे प्रिये! बुद्धिमान पात्र को लाँघे नहीं और उसे ऊपर न उठाये। हे परमेश्वरि! पात्र को धोकर छिपा कर रख दे, यह आज्ञा है।
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