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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 31
साधारं नोद्धरेत् पात्रमनाधारे न निक्षिपेत् । रिक्तपात्रं न कुर्वीत न पात्रं भ्रामयेत् प्रिये ॥
आधार के सहित पात्र को न उठाये और उसे आधार से अलग न रखे। हे प्रिये! पात्र को खाली न करे और उसे घुमाये नहीं।
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