नैकहस्तेन दातव्यं न मुद्रावर्जितं प्रिये ।
पात्रं न चालयेत स्थानान्न कुर्यात् पात्रसङ्करम् ॥
हे प्रिये! एक हाथ से और बिना मुद्रा के पात्र न दे। पात्र को अपने स्थान से न हटाए और उसे अन्य पात्रों में न मिलावे।
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