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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 23
निष्ठीवनं मलं मूत्रमधोवायुविसर्जनम् । श्रीचक्रमध्ये यः कुर्यात् स भवेद् योगिनीपशुः ॥
श्री चक्र के मध्य में थूकना या जो मल, मूत्र एवं अधोवायु का विसर्जन करता है, वह योगिनियों का पशु बनता है।
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