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कुलार्णव • अध्याय 11 • श्लोक 16
कुलाचार्येण तच्छक्त्या दत्तं पात्रश्ञ्च भक्तितः । नमस्कृत्य तु गृह्णीयादन्यथा नरकं व्रजेत् ॥
कुलाचार्य की शक्ति के द्वारा दिये गये पात्र को नमस्कार कर भक्ति के साथ ग्रहण करे, अन्यथा नरक जाना पड़ता है।
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