मत्स्यमांसासवैर्देवि नार्चयेत् पशुसन्निधौ ।
प्रणम्य प्रविशेच्चक्रं विनिर्गच्छेत्प्रणम्य च ॥
हे देवि! पशु के निकट मत्स्य, मांस और आसव के द्वारा पूजन न करे। प्रणाम कर चक्र में प्रवेश करे और प्रणाम करके ही उससे बाहर जाय।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।