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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 97
डाकिनी सर्पवदना वित्तजा ज्वलनप्रभा । कमण्डलुं कर्तृकाञ्च धारयन्ती वरप्रदा ॥
सर्वमुख वाली, वित्तजा (समृद्धि सम्पन्न) वह्नि की प्रभा वाली, हाथ में कमण्डलु, कर्तरिका (कैची), वर और अभय मुद्रा धारण करने वाली डाकिनी देवी का ध्यान करना चाहिए।
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