हे प्रिये! १. अपनी और दूसरे की रक्षा के लिये, २. रोगों के नाश के लिये, ३. पुत्र-प्राप्ति के लिये, ४. वश्य के लिये, ५. मङ्गल (कल्याण) के लिये एवं ६. धर्म, काम तथा अर्थ की सिद्धि के लिए हे देवि! एक सप्ताह या चौदह दिनों तक पूजन करे। अथवा इक्कीस दिनों में अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
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