हे प्रिये! मन में अभीष्ट सङ्कल्प कर गन्ध, पुष्पादि और मधुरत्रय से अलग अलग सम्यक् रूप से अर्चन एवं पूजन कर हे कमलानने! इच्छित कामनाओं की पूर्ति के लिये प्रार्थना करे। इससे साधक की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।