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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 90
हर्षानन्दस्वयंयुक्ताः प्रसन्नाश्च पृथक् पृथक् । पायसाज्यौदनैर्युक्तैर्नैवेद्यैर्भक्तिसंयुतैः ॥ गन्धपुष्पादिभिः सम्यगर्चयित्वा गणेश्वरम् । हसख फ्रें हेसौं (इसौ) डां डीं डमलवरयूं ततः ॥ श्रीपादुकां हेसौ (हसौ) मिति च हसखफ्रें पुटन्ततः ।
भक्तिपूर्वक गन्ध पुष्पादि से गणेश्वर का सम्यक् रूप से पूजन कर खीर, घी, चावल से युक्त नैवेद्य प्रदान करे। पूजन का मन्त्र इस प्रकार है - हसखफ्रें हसौं डां डीं डमलवरयूं श्रीपादुकां हसौं हसखफ्रें।
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