सम्पत्ति मिलने या धन आदि का लाभ होने पर, तप, दीक्षा और व्रत आदि उत्सव में, किसी पीठ में जाने पर, वीरपीठ में, अपने कुटुम्बी के मिलने पर, देशिक के आने पर, पुण्य तीर्थ या देवता का दर्शन होने पर पूजन करे।
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