मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 89
आत्मनोऽनुग्रहार्थं वा परार्थ श्रेष्ठमुत्तमम् । शुचिद्रव्यसमायुक्तं चक्रपूजासमन्वितम् ॥ सर्वेषां दक्षिणां दत्त्वा होमपात्रं पृथक पृथक् । प्रपूजयेच्च वर्णस्थाः सर्वाभरणभूषिताः ॥
हे देवि! 'अनुग्रह' को यथाक्रम बताऊँगा, सुनिए! अपने ऊपर अनुग्रह के लिये या दूसरे पर श्रेष्ठ अनुग्रह के लिये पवित्र द्रव्यों से युक्त चक्रपूजा के सहित सभी को दक्षिणा देकर अलग अलग होमपात्र प्रदान करे और समस्त आभूषणों से सजी हुई वर्ण मातृका स्थित शक्तियों की पूजा करे। स्वयं हर्षानन्द से युक्त रहे और अलग अलग सब प्रसन्न रहें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें