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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 88
न स्मरेद् यदि मूढात्मा योगिनीनां भवेत् पशुः । तस्मात् श्रीचक्रमध्ये तु संस्मरेत् सर्वदेवताः ॥ अनुगृह्णन्ति देवेशि साधकान् नात्र संशयः । अनुमहन्तु वक्ष्यामि शृणु देवि यथाक्रमम् ॥
अतः हे प्रिये! जो गूढ़ श्रीचक्र में योगिनियों और भैरवों का स्मरण नहीं करता है, वह योगिनियों का पशु बनता है। अतः श्रीचक्र के मध्य सभी देवताओं का स्मरण करे । क्योंकि हे देवेशि! वे साधकों पर अनुग्रह करती है, इसमें सन्देह नहीं।
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