हे कुलनायिके! मैं आपसे दृढ़तापूर्वक कहता हूँ कि संसार में कुछ भी कुलपूजा से अधिक नहीं है, कुछ भी नहीं कुछ भी नहीं। अधिक कहने से क्या लाभ, हे पार्वती! रहस्य की बात सुनिए!
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।