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कुलार्णव • अध्याय 10 • श्लोक 77
विना मन्त्रेण पूजा चेद्देवता न प्रसीदति । कुलपूजां सुनियतं यः करोति हि कौलिकः । कुलेशि सर्वदाप्नोति योगिनीवीरमेलनम् ॥
यन्त्र के बिना पूजा करने से देवता प्रसन्न नहीं होते। क्योंकि जो नियमित रूप से कुल पूजा करता है, वह कौलिक है। हे कुलेशि! इस प्रकार वह योगिनी एवं वीर के सम्मिलन से सब कुछ प्राप्त कर लेता है।
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