श्रीचक्र कौलिको मोहाद्विशेषदिवसेषु यः ।
न करोति समर्थः सन् स भवेद् योगिनीपशुः ॥
जो कौलिक समर्थ होकर भी मोहवश विशेष दिनों में श्रीचक्रपूजन को नहीं करता, बह योगिनियों का पशु बनता है।
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