राजा यः कारयेद्देवि भक्त्याष्टाष्टकपूजनम् ।
चतुः सागरपर्यन्तां महीं शास्ति न संशयः ॥
हे देवि! जो राजा भक्तिपूर्वक अष्टाष्टक पूजन कराता है, वह चार सागरों तक व्याप्त पृथ्वी पर शासन करता है, इसमें सन्देह नहीं।
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